अफवाहों की दुनियाँ
तीन दिन पहले घर आते हुए कानों में एक आवाज आई थी कि- कि हाल चाल बौआ (क्या हाल है बाबू) हमने भी झट कह दिया- ठीक छै (ठीक है)। अगले ही पल उन्होंने ने ये कहा कि हाँ आई भरि त ठीक छै (आज भर तो ठीक ही हैं) मैने पूछा किया काइल कि हैत (क्यों कल क्या होगा)? उन्होंने कहा कि ग्रह चल रहा है कोरोना नामक इसको भगाने के लिए हेलीकॉप्टर से दवा छिड़काव किया जाएगा। मैंने तो तत्काल उसे टाल दिया मज़ाक में लेकिन बाद में काफी सोचा। मैं कुछ निष्कर्षों पर पहुँचा था कि किस तरह से सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर हमारे समाज को भटकाया जाता है। पहला अपवाह ये था कि अगर 22 मार्च को हम जनता कर्फ्यू का पालन कर लेंगें तो यह कोरोना भाग जाएगा। दूसरा कि कोरोना के लिए तालियाँ और थालियाँ पीटी जा रही थी। और तीसरा कि हेलीकॉप्टर से से दवा का छिड़काव किया जाएगा। और भी बहुत तरह की अपवाहें उड़ रही थी। मैं समझ रहा था कि ये लोग सब मूर्ख हैं लेकिन मुझे ये नहीं पता था कि सबसे बड़ा मूर्ख मैं हूँ। हो सकता है कि ये लोग मुझे गलत समझे और मैं इन्हें गलत समझता हूँ लेकिन सभी मुद्दों पर दोनों गलत नहीं हो सकते हैं। इसी बीच एक नाम अंग्रेजी में का...